चाहत के बावजूद ब्लॉग नहीं लिख पाता हूँ | जब अरविन्द केजरीवाल सियासत में घुसे भी नहीं थे ,उससे पहले मैंने "झाड़ू " संभाल ली थी | झाड़ू ब्लॉग का मकसद यही था कि देश -समाज और मीडिया में व्याप्त कमियों और खामियों के खिलाफ लिखा जाए | फिर केजरीवाल झाडू ले उड़े लेकिन चुनाव चिन्ह के रूप में लेकिन ब्लॉग पर तो अपना ही हक है | अब फिर से कोशिश है कि झाडू उठाऊँ |