लम्बे अंतराल की खामोशी के बाद फिर से ब्लॉग लिखना शुरू कर रहा हूँ| 2009 में जब "झाडू " नाम से यह ब्लॉग शुरू किया था, तो आदिकाल से प्रचलित सफाई का यह यंत्र ,भारत केउक्तिबोध घर -घर में उपलब्ध होते हुए भी इतना लोकप्रिय नहीं था जितना कि आम आदमी पार्टी का चुनाव चिह्न होने के बाद हुआ | झाडू एकाएक महत्वपूर्ण हो गयी | फिर जब मोदी जी के प्रिय स्वच्छता अभियान की शुरुआत हुई और झाडू उनके हाथों में आई तो बेचारी की किस्मत ही खुल गयी | पिछले एक साल में झाडू की बिक्री में आशातीत वृद्धि हुई है | बाज़ार के विशेषज्ञों को इस वृद्धि का आकलन करना चाहिए |
खैर , अपनी झाडू का मकसद तो व्यवस्था में व्याप्त गंदगी को हटाना है | मुक्तिबोध यही तो कहते थे --इस दुनिया को बेहतर होना चाहिए , हर आदमी को मेहतर होना चाहिए |
खैर , अपनी झाडू का मकसद तो व्यवस्था में व्याप्त गंदगी को हटाना है | मुक्तिबोध यही तो कहते थे --इस दुनिया को बेहतर होना चाहिए , हर आदमी को मेहतर होना चाहिए |