दादा सांसद ,पिता सांसद और अब वो भी सांसद ..रोहतक लोकसभा क्षेत्र से हुड्डा परिवार की तीसरी पीढ़ी लोकतंत्र को सींच रही है । बासठ साल की आयु है लोकसभा की और सत्ताईस साल इस परिवार का कब्ज़ा रहा है । सीट को पुश्तैनी मानते हुए ही भूपेंदर हुड्डा ने मुख्यमंत्री बनने के बाद जब लोकसभा से इस्तीफ़ा दिया तो खाली हुई सीट के लिए उन्हें दस लाख मतदाताओं में केवल अपना ही बेटा मिला,एम् पी बनाने के लिए । बेटा ,दीपेंदर अमेरिका में मोटी तनख्वाह पर नौकरी कर रहा था । सिवाय खून में राजनीति होने के और कोई लियाकत नहीं थी दीपू में लेकिन तमाम उम्र वंशवादी राजनीति का विरोध करने वाले पिता तत्काल बेटे को उसी पुश्तैनी धंधे में ले आये जहां डेढ़ एकड़ जमीन के मालिक खरबपति बन जाते हैं ।
हुड्डा परिवार कोई बड़ा भूपति परिवार नहीं था लेकिन चौ .रणबीर सिंह के आज़ादी के आन्दोलन में शामिल होने के मुआवजे के तौर पर उन्हें नैनीताल जिले में सैकड़ों एकड़ ज़मीन मिली थी । इस आज़ादी की लड़ाई ने रणबीर सिंह की तंगहाली को अच्छी -खासी खुशहाली में बदल दिया । बाद में भूपेंदर हुड्डा सांसद बने तो इस परिवार के पास पेट्रोल पंप व तरह -तरह की एजेंसिया आ गयी और जब नौ साल पहले वे हरियाणा के सुलतान बने तो मानो लक्ष्मी जी ने मातूराम निवास में ही परमानेंट ठिकाना बना लिया । जिस किसी के भी कदम मातुराम निवास में पड़े थे वही सोने का हो गया । कल्पतरु और कामधेनु हुड्डा जी के अंगने में विराजित हो गए । टकसाल में दिन -रात नोट छापते हैं ।सत्तर पीढ़ियों का पुख्ता इंतज़ाम कर दिया आज़ादी की लड़ाई और सत्ता ने ....लोकतंत्र का यह घिनौना रूप ...पूरे देश में ऐसे परिवार निरंतर फल-फूल रहे हैं